स्त्रियों के विशेष रोग तुलसी के चमत्कारी गुण,Special diseases of women and miraculous properties of Tulsi

स्त्रियों के विशेष रोग तुलसी के चमत्कारी गुण

तुलसी किसे नहीं पीना चाहिए?
इससे गर्भाशय संकुचन बढ़ सकता है और गर्भावस्था के बाद प्रसव या मासिक धर्म के दौरान समस्याएं पैदा हो सकती हैं । तुलसी से खून पतला हो सकता है। इस प्रकार, एंटी-क्लॉटिंग दवाओं में इससे बचा जाता है। तुलसी के अधिक उपयोग से पुरुष प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

तुलसी कितने प्रकार की होती है?
इसे अंग्रेजी में होली बेसिल और संस्कृत में तुलसी के नाम से जाना जाता है। तुलसी के लिए उपयोग किए जाने वाले अन्य नाम मंजरी, कृष्णा तुलसी, त्रित्तवु, तुलसी और तुलसी हैं। तुलसी जीनस ओसीमम, तुलसी जीनस की लगभग 60 प्रजातियों में से एक है।

क्या हम तुलसी का पौधा दूसरों को दे सकते हैं?
सौभाग्य के लिए पवित्र तुलसी या तुलसी उपहार के रूप में दी जा सकती है । किसी को तुलसी का पौधा उपहार में देना यह दिखाने का एक शानदार तरीका है कि आप उनके स्वास्थ्य और कल्याण की परवाह करते हैं। चिंता या तनाव से ग्रस्त किसी व्यक्ति को तुलसी की टहनियाँ देने से उनकी चिंताएँ कम हो जाती हैं।
Special diseases of women and miraculous properties of Tulsi

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स्त्रियों के विशेष रोग

स्त्रियों के विशेष रोग तुलसी के बीजों में जो लस और लेपक गुण होता है, वह पुरुषों की जननेंद्रिय संबंधी रोगों में भी विशेष लाभदायक सिद्ध होता है। कुछ लोगों का तो ऐसा विश्वास है कि तुलसी स्त्री वाचक पौधा है और कथाओं में उसे विष्णु की प्रिया भी कहा गया है, इससे वह स्त्री रोगों को दूर करने और उनके स्वास्थ्य संवर्द्धन में विशेष सहायक होते हैं।
  • स्त्रियों के मासिक धर्म रुकने पर तुलसी के बीजों का प्रयोग लाभदायक होता है। तुलसी पंचांग (पत्ते, मंजरी, बीज, लकड़ी और जड़) सौंठ, नीबू की छाल का गूदा, अजवायन, तालीश पत्र, इन सबका जौकुट, इसमें से एक तोला लेकर पावभर पानी में काढ़ा बनाएँ। जब चौथाई पानी रह जाए तो छानकर पी लें। कुछ समय तक यह प्रयोग करने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाता है।
  •  यदि रजोदर्शन (मासिक धर्म) के होने पर तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर तीन दिन तक पी लिया जाए तो गर्भ स्थापना की संभावना कम हो जाती है। यह प्रयोग गर्भ निरोध की दृष्टि से विशेष उपयोगी है क्योंकि यह प्रजनन अंगों को हानि नहीं पहुँचाता। यह उनको शुद्ध और दोषरहित करके शक्तिशाली बना देता है, इसलिए जिस प्रकार यह गर्भ निरोध का कार्य करता है, उसी प्रकार बंध्या स्त्रियों की संतानोत्पत्ति के लिए इनका प्रयोग किया जाता है। इस संबंध में एक प्राचीन ग्रंथ का वचन है-
या स्यान्मृत प्रजा नारी तस्या अंग प्रमार्जयेत । 
सा पुत्र लभते दीर्घ जीवन चाप्यरोगिणाम् ॥
वन्ध्या मार्जयेदङ्ग कुशैर्मन्त्रेण साधकाः। 
साऽपि सम्वत्सरादेव गर्भधत्ते मनोहरम् ॥
अर्थात, 
जिस स्त्री की संतानें जीवित न रहती हों उसके अंगों का तुलसी से मार्जन (शुद्ध) करने पर वह दीर्धजीवी और नीरोग पुत्र उत्पन्न करती है। यदि बंध्या स्त्री का तुलसी एवं कुंशातंत्र से मार्जन किया जाए तो उसके भी एक वर्ष के भीतर सुंदर पुत्र उत्पन्न होता है।
इससे विदित होता है कि तुलसी का विधिपूर्वक प्रयोग और श्रद्धापूर्वक पूजन आदि करने से शारीरिक और मानसिक दोष दूर होकर प्रजनन अंग गर्भ धारण के योग्य हो जाता है, उस अवस्था में पत्तों के काढ़े के बजाए बीजों का चूर्ण और शरबत भी उपयोगी होता है। पहले कुछ समय तक काढ़े का उपयोग करके अंगों को फिर शुद्ध किया जाए और फिर बीजों के प्रयोग से गर्भाशय को शक्तिशाली बनाया जाए तो संतानोत्पत्ति की संभावना निश्चित रूप से बढ़ सकती है।
  • गर्भिणी स्त्री की छाती और पेट की खुजली के लिए वन तुलसी के बीजों का लेप करने से आराम होता है।
  •  तुलसी के बीज और आमा हलदी समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर जननेंद्रिय पर छिड़कने से योनिभ्रंश-जननेंद्रिय का स्थान च्युत हो जाने की अवस्था में लाभप्रद होता है। गर्भावस्था में पेट के अधिक बढ़ जाने से पेडू पर जो दरार सी पड़ जाती हैं और जिनमें कभी-कभी खुजली चलने लगती है, वे तुलसी के पिसे हुए पत्तों की पुल्टिस सी बनाकर मलने से ठीक हो जाती हैं।
  • तुलसी के रस में जीरा पीसकर उसे गाय के धारोष्ण दूध के साथ सेवन किया जाए तो प्रदर रोग में सुधार होकर स्त्री का स्वास्थ्य ठीक हो जाता है।
  • प्रसव के समय तीव्र वेदना होने पर तुलसी का रस एक तोला पिलाने से लाभ होता है और गर्भस्थ शिशु के बाहर निकलने में सरलता होती है। तुलसी की जड़ स्त्री की कमर में बाँधने से प्रसव का कष्ट मिटकर सुखपूर्वक संतान उत्पन्न होती है।
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  1. तुलसी से रोगों का उपचार एवं तुलसी के गुणों का वर्णन 
  2. तुलसी प्रकृति के अनुकूल औषधि और तुलसी के लाभ 

तुलसी के कई चमत्कारी फ़ायदे हैं. 

तुलसी के पत्तों का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों से राहत मिलती है
  1. तुलसी के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं.
  2. तुलसी का रस कान के दर्द और सूजन में भी बहुत असरदार होता है.
  3. तुलसी विटामिन सी और जिंक से भरपूर होती है.
  4. तुलसी कैंसर रोधी गुणों से भरपूर होती है.
  5. तुलसी त्वचा और बालों के लिए अच्छी होती है.
  6. तुलसी ओरल हेल्थ के लिए बेहतरीन है.
  7. तुलसी तनाव और थकान को कम करती है.
  8. किडनी स्टोन में तुलसी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  9. शहद के साथ तुलसी का सेवन करने से सर्दी-जुकाम और गले का दर्द ठीक हो जाता है.
  10. प्रसव के बाद महिलाओं को होने वाले दर्द से आराम दिलाने में तुलसी की पत्तियां फ़ायदेमंद होती हैं.
  11. तुलसी के बीज में फ्लैवोनोइड्स और फ़ेनोलिक यौगिक होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुधारने में मदद करते हैं.
  12. तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से जुकाम, सिर दर्द, बुखार आदि रोगों से राहत मिलती है.
  13. तुलसी के पत्तों को चबाकर ऊपर से पानी पीने से कैंसर से राहत मिलती है.
  14. खांसी, दमा, इओसिनोफ़िल आदि में तुलसी के 10 पत्ते, एक चम्मच बायबडिंग का काढ़ा बनाकर पीने से फ़ायदा मिलता है.

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