होलिका दहन श्री कृष्ण और पूतना की कथा ,Holika Dahan Story of Shri Krishna and Putana

होलिका दहन श्री कृष्ण और पूतना की कथा

हिंदुओं का लोकप्रिय त्यौहार होली

होली को रंगो के त्यौहार के रूप में जाना जाता है। यह त्यौहार भारतीय संस्कृति में आने वाले महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में इस त्यौहार का आगमन होता है। इस त्यौहार को पसंद करने वाले लोग हर साल होली के आने का बेसब्री से इंतज़ार करते है। होली एक प्रेम से भरा त्यौहार है जो पूरा परिवार व सभी दोस्त मिलकर मनाते है।
Holika Dahan Story of Shri Krishna and Putana
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होलिका दहन श्री कृष्ण और पूतना की कथा 

श्रीकृष्ण का होली से गहरा रिश्ता माना जाता है। ये पर्व राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रतीक के तौर पर देखा तो देखा ही जाता है, साथ ही पौराणिक कथाओं के अनुसार - एक प्रचलित कथा श्री कृष्ण और पूतना नामक राक्षसी की भी है। जब भगवान कृष्ण गोकुल में बड़े हो रहे थे, मथुरा के राजा कंस ने उन्हें खोजने और मारने की कोशिश की। कंस ने कृष्ण के मिलने तक सभी बच्चों को मारने के लिए राक्षसी पूतना को भेजने का फैसला किया। उसने कंस के राज्य में सभी शिशुओं को बेरहमी से मारना शुरू कर दिया। उसने पड़ोसी राज्यों में भी शिशुओं को मारना शुरू कर दिया। चुपचाप घरों में घुसकर, वह बच्चों को तब उठा लेती थी जब उनकी माताएँ या तो सो रही होती थीं या घर के कामों में व्यस्त होती थीं। वह खेतों में काम करने वाले माता-पिता के बच्चों का अपहरण भी कर लेती थी। 
राज्य के सभी बच्चों को खत्म करने की अपनी खोज में, पूतना कृष्ण के गाँव पहुँची। वह सूर्यास्त के बाद गाँव में दाखिल हुई ताकि कोई उसे पहचान न सके। वह जहां भी जाती, लोगों को यशोदा और नंदराज के नवजात शिशु के बारे में बात करते सुनती थी। नन्हे बालक के दिव्य रूप को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध नजर आ रहा था। पूतना ने तुरन्त जान लिया कि यही वह बालक है जिसकी उसे तलाश थी। उसने रात गाँव के बाहर बिताने और सुबह कृष्णा के घर जाने का फैसला किया। पूतना ने एक सुंदर स्त्री का वेश धारण किया और के यशोदा और नंद के घर पहुंचीं, जहां यशोदा ने उनका अच्छी तरह से स्वागत किया। उसने अपना परिचय दिया और यशोदा से अनुरोध किया कि वह उसे कृष्ण को खिलाने की अनुमति दे। यशोदा ने भी सोचा कि सुंदर युवती कोई देवी थी और पूतना के अनुरोध पर सहमत हो गई।पूतना ने नन्हे कृष्ण को गोद में उठा लिया और उसे खिलाने लगी और अपने जहरीले दूध का स्तनपान उसे कराने लगी। उसने सोचा कि कुछ ही मिनटों में कृष्ण निर्जीव हो जाएंगे। इसके बजाय, पूतना को अचानक ऐसा लगने लगा जैसे वह छोटा लड़का उसके जीवन को चूस रहा हो। उसने कृष्ण को अपने से दूर करने की कोशिश की लेकिन ऐसा करने में असमर्थ रही। बच्चे को डराने के लिए वह अपने मूल रूप में वापस आ गई। वह हवा में उड़ने लगी ताकि बच्चा डर कर उसे छोड़ दे। लेकिन सब व्यर्थ था। कृष्ण ने उसे जाने नहीं दिया और अंततः पूतना के पूरे जीवन को चूस लिया। पूतना का निर्जीव शरीर भूमि पर गिर पड़ा और तब से ही पूतना जैसी बुराई के अंत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन करने की मान्यता है।
 

होलिका दहन पूजा सामग्री

  • कच्चा सूती धागा
  • नारियल
  • गुलाल पाउडर
  • रोली, अक्षत, धूप और फूल
  • गाय के गोबर से बनी माला
  • बताशा, नया अनाज और मूंग की साबूत दाल

होलिका दहन पूजा विधि

  • होलिका दहन के लिए इक्ट्ठा की गई लकड़ी को कच्चा सूत से तीन या सात बार लपेटें।
  • इसके बाद उसपर गंगाजल या शुद्ध पानी, फूल और कुमकुम छिड़कर कर पूजा करें।
  • पूजा के लिए माला, रोली, अक्षत, बताशे-गुड़, साबुत हल्दी, गुलाल, नारियल सब का प्रयोग करें।
  • ‘असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्त्वां पूजायिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव।।’ का उच्चारण करते हुए होलिका की सात परिक्रमा करें। पूजा करते समय होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
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होलिका दहन प्रश्नोत्तरी ( Holika Dahan Quiz )

  • होलिका दहन का दूसरा नाम क्या है?
इसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि भी कहा जाता है। कई अन्य हिंदू त्योहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन की तैयारी त्योहार से 40 दिन पहले शुरू हो जाती हैं।
  • होलिका दहन की पूजा कैसे की जाती है?
पूजा के लिए माला, रोली, अक्षत, बताशे, साबुत हल्दी (हल्दी के उपाय), गुलाल, नारियल आदि लें। इसके बाद मंत्र का उच्चारण करते हुए होलिका अग्नि की सात बार परिक्रमा करें। पूजा करते समय होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:।
  • होली कब जलाया जाएगा?
रात में भद्रा रहित पूर्णिमा तिथि में ही होलिका दहन का विधान है। 24 मार्च की रात 10.40 बजे के बाद भद्रा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद होलिका दहन किया जा सकेगा। 26 को भी मनेगी होली- भारतीय धर्म शास्त्रों के अनुसार वर्ष 2024 की होली 26 मार्च को है जबकि 25 मार्च को केवल काशी में होली मनाई जाएगी।

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  • होली की शुरुआत क्यों हुई?
होली अलाव या होलिका दहन हिंदू पौराणिक कथाओं से होलिका और प्रह्लाद की कहानी पर आधारित एक उत्सव है। इस उत्सव की शुरुआत बुन्देलखण्ड में झाँसी के एरच से हुई। यह कभी हिरण्यकश्यप की राजधानी हुआ करती थी। इस कथा के अनुसार हिरण्यकशिपु नाम का एक राक्षस राजा था।
  • भक्त प्रह्लाद से जुडी है कथा
उनकी बुआ होलिका जिसको ऐसा वस्त्र वरदान में मिला हुआ था जिसको पहन कर आग में बैठने से उसे आग नहीं जला सकती थी। होलिका भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए वह वस्त्र पहनकर उन्हें गोद में लेकर आग में बैठ गई। भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति के फलस्वरूप होलिका जल गई और प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ।
  • क्या होली एक त्योहार है?
होली एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है। इसे दुनिया भर में मनाया जाता है. होली का उत्साह और मस्ती का शोर पूरी दुनिया में अपने तरह का होता है।
  • होलिका दहन पर क्या नहीं करना चाहिए?
  1. घर की सुख समृद्धि के लिए होलिका दहन के दिन भूलकर भी न करें ये काम
  2. मांस मदिरा का सेवन न करें ...
  3. किसी को पैसे उधार न दें ...
  4. बुजुर्गों का अपमान न करें ...
  5. किसी अन्य के घर में भोजन न करें ...
  6. बाल खुले न छोड़ें ...
  7. गर्भवती महिलाएं न करें होलिका की परिक्रमा ...
  8. नव विवाहित स्त्रियां ससुराल में न देखें होलिका दहन ...
  9. लड़ाई झगड़ा न करें
  • होलिका दहन में क्या डालना चाहिए?
मान्यता के अनुसार, होलिका की अग्नि इतनी पवित्र मानी जाती है कि जिसमें जीवन के सभी कष्टों का नाश हो सकता है. होलिका दहन के दिन होलिका प्रज्वलित होने के बाद उसमें 11 उपलों की माला, पान, सुपारी, नारियल, अक्षत, चना इत्यादि, साथ ही भोग में मीठा अर्पित करना चाहिए.

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  • होलिका की मृत्यु कैसे हुई?
अपने भाई की बात को मानकर होलिका भतीजे प्रहलाद को गोदी में लेकर अग्नि में बैठ गई। उसका अहित करने के प्रयास में होलिका तो स्वयं जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद हंसते हुए अग्नि से बाहर आ गया।
  • होलिका पूर्व जन्म में कौन थी?
आओ जानते हैं कि होलिका का असली नाम क्या था और वह पूर्वजन्म में कौन थीं। होलिका हिरण्यकश्यप की छोटी बेहेन और प्रह्लाद की बुआ थी। वह अग्नि की उपासक थी और उसे शिव से अग्नि में नहीं जलने का वरदान मिला था। होलिका को भगवन शिव से वरदान के रूप में एक दिव्य वस्त्र मिला था।
  • होलिका दहन में कैसे नजर उतारा जाता है?
सागर के सानौधा गांव की बुजुर्ग दादी द्रोपदी बाई ने local 18 से बताया कि जिस दिन होलिका दहन किया जाता है. उस दिन घर में जितने भी सदस्य होते हैं, उन सभी की नजर उतारने की परंपरा है. प्रत्येक सदस्य के हिसाब से काले उड़द के गिनकर 7 दाने लेते हैं, बारी-बारी से उनको बैठ कर सात बार उनके सिर के ऊपर से घुमाकर फेर लेते हैं.
  • होलिका दहन में कौन जलाया जाता है?
बस होलिका उसी वस्‍त्र को ओढ़कर प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में आकर बैठ गई। जैसे ही प्रह्लाद ने भगवान विष्णु के नाम का जाप किया, होलिका का अग्निरोधक वस्त्र प्रह्लाद के ऊपर आ गया और वह बच गया, जबकि होलिका भस्म हो गई थी।
  • होलिका दहन की राख रखने से क्या फायदा?
अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हो तो आप लोग होलिका दहन की अग्नि की बची हुई राख को घर लाकर लाल कपड़े में बांध लें और फिर उसको धन रखने के स्थान जैसे अलमारी या तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से धन में वृद्धि के योग बनेंगे। साथ ही धन आगमन के नए मार्ग बनेंगे।
  • होलिका दहन की राख से क्या होता है?
होली के दिन सुबह होलिका दहन की राख ले आए और उसे पूरे घर में छिड़क दें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से घर के वास्तु दोष से छुटकारा मिलता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। साथ ही गृह क्लेश दूर होते हैं।
  • होलिका दहन के दिन क्या क्या खाना चाहिए?
होलिका दहन के दिन गेहूं और गुड़ से बनी रोटी खाने से मिलता है विशेष लाभ
  • होलिका दहन में लोग नारियल क्यों डालते हैं?
होलिका दहन के दिन एक सूखा नारियल अपने ऊपर घुमाकर जलती अग्नि में डाल दें। इससे बुरे प्रभावों से राहत मिल सकती है । इसके अलावा होलिका दहन के दिन दो लौंग लें और उन्हें घी में डुबा लें।
  • होलिका दहन पर कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए?
इसके अतिरिक्त, गर्म मौसम के दौरान सफेद कपड़े एक आरामदायक विकल्प हैं। सफेद रंग सत्य और शांति का भी प्रतीक है। हिंदुओं का मानना ​​है कि होली और होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत और भाईचारे का उत्सव है।
  • होलिका दहन में क्या डालें?
अच्छे स्वास्थ्य के लिए यदि आप उत्तम स्वास्थ्य की कल्पना करते हैं तो होलिका दहन के दिन नीम की 10 पत्तियां लेकर 6 लौंग और थोड़ा सा कपूर का टुकड़ा लें और अपने ऊपर से 5 या 7 बार उतारकर होलिका की अग्नि में डाल दें. मान्यता के अनुसार ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है.

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